सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Education लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्री-प्राइमरी के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक एवं शिक्षामित्र होंगे प्रशिक्षित, पढ़े विस्तृत जानकारी

कुशीनगर:  प्री-प्राइमरी के बच्चों को पढ़ाने के लिए जिले के कक्षा पांच तक के परिषदीय स्कूलों के शिक्षक व शिक्षामित्रों को प्रशिक्षित किया जायेगा निपुण भारत मिशन के तहत बीआरसी वार प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर उन्हें ट्रेंड किया जायेगा। इन्हें प्रशिक्षित करने के लिए जिले में तैनात सभी 70 एआरपी को प्रशिक्षक नियुक्त किया गया है। फरवरी के प्रथम सप्ताह से बीआरसी पर प्रशिक्षण शुरू होगा। समग्र शिक्षा अभियान के तहत बच्चों में बुनियादी भाषा व गणित में कौशल विकास के लिए प्राथमिक विद्यालय में तैनात सभी शिक्षक व शिक्षामित्रों को फाउंडेशनल लिटरेसी एवं न्यूमरेसी एफएलएन अधारित प्रशिक्षण दिया जायेगा।  मिशन प्रेरणा के द्वितीय चरण के निपुण भारत मिशन के तहत शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जायेगा।  प्रत्येक ब्लॉक में 2 से 3 बैच बनाकर प्रशिक्षित किया जायेगा। चार दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को भोजन व नास्ता के साथ प्रशिक्षण में सहायक सामग्री प्रदान की जायेगी। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।  जिले के प्राथमिक स्तर के 6200 शिक्षक व 2300 शिक्षामित्रों को बैचवार प्रशिक्षित...

CTET 2021: सीटेट परीक्षा की हर शिफ़्ट में पूछे जा रहे है, जेंडर बेस्ड सवाल, यहाँ पढ़ें 10 सम्भावित प्रश्न

 CTET 2021 (CDP Gender based Questions): 16 दिसंबर 2021 से सीटेट परीक्षा शुरू हो चुकी है शिक्षक बनने की चाह रखने वाले 20 लाख से अधिक उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होंगे।यह परीक्षा अलग-अलग दिन दोस्तों में आयोजित की जा रही है जो कि 13 जनवरी 2022 तक चलेगी।  यदि आप भी सीटेट परीक्षा देने जा रहे हैं  तो इस आर्टिकल में शेयर की गई जानकारी आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यहां हम सीटेट पेपर -1 तथा पेपर -2 में पूछे जाने वाले “बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र” (CDP) के महत्वपूर्ण टॉपिक “जेंडर” (Gender) पर आधारित कुछ महत्वपूर्ण सवाल (CDP Gender based Questions) लेकर आए हैं हाल ही में आयोजित की गई शिफ़्टों में पूछे गए है। सीटेट परीक्षा में पूछे जाते हैं CDP के इस टॉपिक से सवाल — CDP Gender Based Questions for CTET 2021 Paper 1 & 2 1.एक अच्छी पाठ्य पुस्तक – – – – -से बचती है । (a) लैंगिक पूर्वाग्रह (b) लैंगिक संवेदनशीलता (c) लैंगिक समानता (d) सामाजिक उत्तरदायित्व Ans-(a) 2. राज्य स्तर की एक एकल गायन प्रतियोगिता के लिए विद्यार्थियों को तैयार करते समय विद्यालय लड़कियों को वरीयता देता है...

CTET/UPTET 2021: Social Learning Theory Notes and MCQ अल्बर्ट बंडूरा सामाजिक अधिगम का सिद्धांत, हिन्दी में नोट्स

 यदि आप CTET, यूपीटीईटी या किसी भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की तैयारी कर रहे है तो “Albert Bandura’s Social Learning Theory (अल्बर्ट बंडूरा सामाजिक अधिगम का सिद्धांत) टॉपिक को आपको अच्छे से पढ़ लेना चाहिए।  इस टॉपिक से परीक्षाओ मे हमेशा प्रश्न पूछे जाते है इसीलिए इस आर्टिकल मे हम Albert Bandura Theory Notes शेअर कर रहे है। बंडूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत— Albert Bandura’s Social Learning Theory प्रतिपादक- अल्बर्ट बंडूरा निवासी- कनाडा जन्म-  4 दिसंबर 1925 सिद्धांत– 1977 में प्रयोग- बॉर्बी डॉल, जीवित जोकर सामाजिक अधिगम का अर्थ (Meaning of social learning) –  दूसरों को देखकर उनके अनुरूप व्यवहार करने के कारण वह दूसरों के व्यवहार को अपने जीवन में उतारने तथा समाज द्वारा स्वीकृत व्यवहारों को धारण करने तथा अमान्य व्यवहारों को त्यागने का कारण ही ‘सामाजिक अधिगम’ कहलाता है । Note- इस सिद्धांत में अनुकरण द्वारा सीखा जाता है । अल्बर्ट बंडूरा के सिद्धांत के अन्य नाम 1. सामाजिक अधिगम सिद्धांत । 2. अवलोकन का सिद्धांत । 3. अप्रत्यक्षात्मक का सिद्धांत । 4. प्रेक्षणात्मक का सिद...

UPTET 2021 Kohlberg Moral Development Notes & MCQ: टीईटी परीक्षा मे कोहलबर्ग सिद्धांत से पूछे जाएंगे ये सवाल, अभी देखें

 UPTET 2021 (Kohlberg Moral Development Notes and MCQ): यदि आप शिक्षक बनने के लिए सीटेट तथा यूपीटेट जैसी परीक्षाओं में सम्मिलित होने जा रहे हैं तो आपको तो Kohlberg Moral Development (कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धान्त) टॉपिक को आपको अच्छे से पढ़ लेना चाहिए इस टॉपिक से परीक्षाओ मे हमेशा प्रश्न पूछे जाते रहे है।  इसीलिए इस आर्टिकल मे हम Kohlberg Moral Development Notes शेअर कर रहे है, जिसमे हमने —  कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धान्त क्या है?  नैतिकता का अर्थ एवं विकास की अवस्थाएं सहित परीक्षा मे पूछे जाने वाले  कोहलबर्ग से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न आदि कवर किया है। आशा है ये जानकारी आपको आगामी परीक्षा मे सहायता करेंगी। लारेन्स कोलबर्ग (Lawrence Kohlberg कौन थे? लॉरेंस कोल्हबर्ग ( 25 अक्टूबर, 1927 - 19 जनवरी, 1987) एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे इन्हें नैतिक विकास के चरणों के अपने सिद्धांत के लिए जाना जाता है।  उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग में और हार्वर्ड विश्वविद्यालय में शिक्षा के ग्रेजुएट स्कूल में प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।...

पाठ योजना कैसे बनायें? देखें CLASS-5 ENGLISH LESSON PLAN

  CLASS-5 ENGLISH LESSON PLAN PDF में डाऊनलोड करने के लिए यहां देखें।

आकलन प्रपत्र का निर्माण कैसे करें? देखें कक्षा- 1 गणित का सैम्पल प्रपत्र

आकलन प्रपत्र का निर्माण बच्चों के स्तर को जानने के लिए किया जाता है, जिससे आगामी शिक्षण योजना का निर्माण किया जा सके। प्रारंभिक आकलन के पश्चात ही शिक्षण योजना के अनुसार कार्य प्रारंभ करना चाहिए।  

शिक्षण योजना कैसे बनायें? देखें कक्षा शिक्षण हेतु कुछ शिक्षण योजनाएँ नमूने के रूप में

शिक्षण योजनाएं:-  हम सभी मानते हैं कि 'सीखने-सिखाने की प्रकिया और शिक्षण की सफलता शिक्षण योजनाओं पर निर्भर होती है।  इसलिए कक्षा शिक्षण हेतु कुछ शिक्षण योजनाएँ नमूने के रूप में जा रही हैं जो विभिन्न कक्षाओं और विषयों पर आधारित हैं। इन शिक्षण योजनाओं में लर्निंग आउटकम को केन्द्र बिन्दु (Focal Point) के रूप में लिया गया है।  पाठ्यकरम की भिन्न-भिन्न अताओं/ कौशलों के लिये अनेक गतिविधियों और अभ्यासों को भी शामिल किया गया हैं। साथ ही इनमें पाठ्यपुस्तक से संबंधित प्रकरणों और कार्यपुस्तिका के अभ्यासों को भी शामिल किया गया है।  शिक्षण योजना के विभिन्न चरणों हेतु अनुमानित समय का भी बँटवारा किया गया है । आपसे अपेक्षा है- सभी शिक्षक साथी इसी पैटर्न पर शिक्षण योजना बनाकर अपनी कक्षाओं में सीखने-सिखाने की गतिविधि संचालित करेंगे। इन शिक्षण योजनाओं में सुझायी गयी गतिविधियों के अलावा अन्य गतिविधियों को भी आवश्यकतानुसार शामिल कर उपयोग करेंगे। अपनी योजना के आधार पर उपयुक्त सामग्री और गतिविधियों की तैयारी करेंगे और कक्षा में एक बेहतर वातावरण बनाएंगे। चयनित लर्निंग आउटकम से संबंधित पाठ को...

भाषा विकास के तरीके एवं सम्बन्धित गतिविधियां

शिक्षक प्रतिवर्ष माह अप्रैल में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों का आरग्भिक परीक्षण करके उनके अधिगम सम्प्रापित स्तर जानने की प्रक्रिया करेंगे जो बच्चे आरम्भिक परीक्षण में कक्षा 1-2 के लर्निग आउटकम के स्तर पर होंगे उन्हें 50 कार्य दिवसीय फाउण्डेशन लर्निंग शिविर में भाषा/ गणितीय गतिविधियां सम्पादित करके मुख्यधारा में लाना होगा तत्पश्चात् कक्षा 3-4 और 5 की भाषा / गणितीय दक्षताओं के विकास की गतिविधियों सम्पादित करना उचित होगा। भाषा उपयोग से ही सीखी जाती है। इसलिए भाषा शिक्षण में सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने के कारण का उपयोग करना चाहिए।  शिक्षक के रूप में हमारा कार्य है बच्चों में भाषा के विविध रूपों में उपयोग का कारण उत्पन्न करना।  भाषा में अर्थ का निर्माण सन्दर्भ के सहारे होता है। हम अपने मन में कही अथवा सुनी गई बात के अर्थ का निर्माण करते हैं, फिर उसकी अभिव्यक्ति होती है मन में शब्दों के माध्यम से छवि बनाना भाषा सीखने के लिए सबसे आवश्यक है। इस स्तर पर भाषा शिक्षण में निम्नांकित बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। कक्षा में व्यक्तिगत और समूह कार्य का उचित संतुलन बनाये रखना। कक्षा में ब...

गणित सीखने-सिखाने का सही क्रम क्या होना चाहिए?

बच्चों के पास स्कूल आने से पहले गणित से सम्बन्धित अनेक अनुभव पास होते हैं बच्चों के तमाम खेल ऐसे जिनमें वे सैंकड़े से लेकर हजार तक का हिसाब रखते हैं। वे अपने खेलों में चीजों का बराबर बँटवारा कर लेते हैं।  अपनी चीजों का हिसाब रखते हैं। छोटा-बड़ा, कम-ज्यादा, आगे-पीछे, उपर-नीचे, समूह बनाना, तुलना करना, गणना करना, मुद्रा की पहचान, दूरी का अनुमान, घटना-बढ़ना जैसी तमाम अवधारणाओं से बच्चे परिचित होते हैं।  हम बच्चों को प्रतीक ही सिखाते हैं। उनके अनुभवों को प्रतीकों से जोड़ना महत्वपूर्ण है। गणित मूर्त और अमूर्त से जुड़ने और जूझने का प्रयास है अवधारणाएँ अमूर्त होती हैं चाहे विषय कोई भी हो।  गणितीय अमूर्तता को मूर्त, ठोस चीजों की मदद से सरल बनाया जा सकता है। जब मूर्त को अमूर्त से जोड़ा जाता है तो अमूर्त का अर्थ स्पष्ट हो जाता है।  प्रस्तुतीकरण के तरीकों से भी कई बार गणित अमूर्त प्रतीत होने लगता है। शुरुआती दिनों में गणित सीखने में ठोस वस्तुओं की भूमिका अहम होती है इस उम्र में बच्चे स्वाभाविक तौर पर तरह-तरह की चीजों से खेलते हैं, उन्हें जमाते. बिगाड़ते और फिर से जमाते हैं।...

गणित में जोड़ शिक्षण के तरीके और गतिविधियां, देखें गतिविधियों के माध्यम से

गणित सीखने-सिखाने के परम्परागत तरीकों में गणित सीखने की प्रक्रिया की लगातार होती गयी है और धीरे-धीरे वह परिणाम आधारित हो गयी।  आप भी अपनी कक्षा में यही सब नहीं कर रहे हैं? कैसा माहौल रहता है आपकी गणित की कक्षा में? इसी माहौल से गुजर कर आपके सवालों के सही जवाब भी देने लगते होंगे।  पर क्या आपने जानने की कोशिश की कि ने सही जवाब देने के लिए किस प्रक्रिया को अपनाया? एक साधारण जोड़ को बच्चे ने इस प्रकार किया।   यहाँ विचार करें तो आप पाते हैं कि पहले प्रश्न को बच्चे ने सही हल किया परन्तु दूसरे शल में वही प्रक्रिया अपनाने के बाद भी क्यों उसका उत्तर सही नहीं हैं? क्या हमारी लक्ष्य केवल इतना है कि बच्चा जोड़ना सीख लें? या उसमें जोड़ करने की प्रक्रिया की समझ भी विकसित करनी है वास्तव में जोड़ की समझ के विकास में निहित है। दो या अधिक वस्तुओं या चीजों को एक साथ मिलने से परिणाम के रूप में वस्तुओं की संख्या का बढ़ना। स्थानीय मान का शामिल होना। . यह समझना है कि हासिल अर्थात जोड़ की क्रिया में परिणाम दस या अधिक होने पर दहाई की संख्या अपने बायें स्थित दहाइयों में जुड़ती हैं जिसे हासिल समझा ...

समावेशी शिक्षा क्या है? समावेशी शिक्षा की विशेषताएं एवं रिपोटिंग/डाक्युमेन्टेशन

कक्षा में बच्चों के साथ कार्य करते हुए आपने अनुभव किया होगा कि हर बच्चा स्वयं में कोई न कोई विशिष्टता एवं विविधता लिए होता है । उनके रुचि और रुझानों में भी यह विविधता पाई जाती है।  यह विविधता काफी हद तक उनके परिवेश एवं परिस्थितियों के कारण या शारीरिक आकार प्रकार से प्रभावित होती है। बच्चों में इस विविधता के कारण कुछ खास श्रेणियाँ उभरकर आती हैं। जैसे- तेज/धीमी गति से सीखने वाले, शारीरिक कारणों से सीखने में बाधा अनुभव करने वाले बच्चे, परिवेशीय व लैंगिक विविधता वाले बच्चे।  इनमें कुछ और श्रेणियाँ भी जुड़ सकती हैं। शिक्षक के रूप में इतनी विविधता से भरे बच्चों को हमें कक्षा के भीतर सीखने का समावेशी वातावरण देना होता है। समावेशी शिक्षा अर्थात् ऐसी शिक्षा जो सबके लिए हो। विद्यालय में विविधताओं से भरे सभी प्रकार के बच्चों को एक साथ एक कक्षा में शिक्षा देना ही समावेशी शिक्षा है। समावेशी शिक्षा से तात्पर्य है वह शिक्षा जिसमें किसी एक विशेष व्यक्ति श्रेणी पर निर्भर न होकर सभी को शामिल किया जाता है । "समावेशन शब्द का अपने-आप में कुछ खास अर्थ नहीं होता है। समावेशन के चारों ओर जो वैचारिक, ...

सामुदायिक सहयोग हेतु कार्य-योजना निर्माण कैसे करें?

विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) के सदस्य विद्यालय और समुदाय के बीच प्रमुख सेतु हं भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रत्येक विद्यालय को एस०एम०सी0 सहयोग से सामुदायिक सहयोग की कार्य योजना विकसित करनी होगी। कार्य योजना के संभावित क्षेत्र निम्नवत हो सकते हैं। (अ) भौतिक संसाधन-चहारदिवारी, पंखा, फर्नीचर, स्टेशनरी, पेयजल, स्मार्ट बोर्ड, शैक्षिक तकनीकी से संबंधित उपकरण आदि। (ब) मानवीय संसाधन-सामुदायिक संसाधनों का कक्षा-कक्षीय एवं अन्य सहशैक्षिक क्रियाकलाप में उपयोग।  उक्त बिन्दुओं के परिप्रेक्ष्य में हमें अपनी संस्था उपलब्ध भौतिक / मानवीय संसाधनों की उपलब्धता की समीक्षा करने के बाद विद्यालय की आवश्यकताओं का चिह्नांकन करना होगा तदुपरान्त उन आवश्यकताओं का वर्गीकरण करते हुए सामुदायिक सहभागिता के प्रकार को स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हुए समुदाय से संपर्क स्थापित करना होगा।  इस प्रकार आवश्यकताओं के अनुसार संदर्भों/ स्रोतों की मदद लेते हुए कार्य योजना विकसित कर हम अपने कार्य को और बेहतर बना सकते हैं तथा समुदाय से बेहतर जुड़ाव स्थापित कर सकते हैं ।         ...

शिक्षण के तरीके और गतिविधियाँ

परिवेश, पर-परिवार, कक्षा-कक्षा में उपलब्ध विभिन्न आकृति की वस्तुओं पर बातचीत करने छूकर पता करने, उलटने--पलटने एवं विविध रूपों में जमाने के अनुभव का भीका देने से बच्चों में ज्यामितीय आकृति सम्बन्धी अवधारणात्मक समझ का विकास होता है। यह समझ निम्नांकित रूपों में हो सकती है- एक ही आकृति के कई रूप हो सकते हैं। एक ही आकृति में एक से अधिक रूप समाहित होते हैं। एक आकृति के अलग-अलग संयोजन से नयी आकृतियाँ बनती हैं। अलग-अलग प्रकार की आकृतियों को समझने के लिए एक ही प्रकार के तरीके कारगर नहीं होते अर्थात प्रत्येक प्रकार की आकृति को एक ही प्रकार से नहीं समझा जा सकता। इस प्रक्रिया के दौरान बच्चे यह भी समझने व अनुभव करने में समर्थ हो जाते हैं कि गेंद और गोले का चित्र उसे पूरी तरह से व्यक्त नहीं कर पाता है।  यह वृत्ताकार क्षेत्र से किस प्रकार भिन्म है? इन आकृतियों की समझ उन्हें आगे चलकर परिमाप, क्षेत्रफल एवं आयतन तक किस प्रकार ले जाती है? इनके अवधारणात्मक समझ के विकास के लिए शुरुआती कक्षाओं में आगे दिए गए सुझाव और गतिविधियों का शिक्षण में प्रयोग बच्चों के सीखने में सार्थक प्रभाव लाएगा। गतिविधि-1, अ...

विद्यालयों में सहशैक्षिक गतिविधियों को कैसे क्रियान्वित करें?

प्रारम्भिक विद्यालयों में सह शैक्षिक गतिविधियों के आयोजन में प्रधानाध्यापक एवं अध्यापक की भूमिका को निम्नवत् देखा जा सकता है।  • विद्यालयों में सहशैक्षिक गतिविधियों को कैसे क्रियान्वित करें, इसके बारे में परस्पर चर्चा करना तथा आवश्यक सहयोग प्रदान करते हुए निरंतर संवाद बनाये रखना। क्रियाकलापों का अनुश्रवण करना तथा आयी हुई समस्याओं का निराकरण सभी की सहभागिता द्वारा करना। इन क्रियाकलापों में बालिकाओं की सहभागिता अधिक से अधिक हो साथ ही साथ सभी छात्रों की प्रतिभागिता सुनिश्चित हो, इस हेतु सामूहिक जिम्मेदारी लेना।। • समय सारिणी में खेलकूद/ पीटी,ड्राइंग, क्राफ्ट, संगीत, सिलाई/बुनाई व विज्ञान के कार्यों प्रतियोगिताएं हेतु स्थान व वादन को सुनिश्चित करना।  • स्कूलों में माहवार/त्रैमासिक कितनी बार किस प्रकार की प्रतियोगिताएं कराई गई, इसकी जानकारी प्राप्त करना एवं रिकार्ड करना। बच्चों के स्तर एवं रुचि के अनुसार कहानियां, चुटकुले, कविता आदि का संकलन स्वयं करना तथा बच्चों से कराना।  • विज्ञान/गणित सम्बन्धी प्रतियोगिताओं हेतु विषय से सम्बन्धित प्रश्न बैंक रखना। आवश्यक वस्तुओं का संग्रह ...