UPTET Hindi Sanskrit Revision 2026: Top 15 MCQs for Paper 2 | Pedagogy Notes

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UPTET Hindi + Sanskrit Revision 2026 Top 15 MCQs for Paper 2 with Pedagogy नोट: UPTET Paper 2 में भाषा-1 और भाषा-2 में हिंदी/संस्कृत के 30+30 प्रश्न आते हैं. हर भाषा में 15 Content + 15 Pedagogy. ये 15 MCQs व्याकरण, साहित्य और NEP 2020 से सबसे ज्यादा Repeat होते हैं. भाषा का उद्देश्य 'भावों की अभिव्यक्ति' है. हिंदी - व्याकरण + साहित्य MCQs Q1. 'परोपकार' शब्द में कौन-सा समास है? A) द्विगु समास B) तत्पुरुष समास C) द्वंद्व समास D) बहुव्रीहि समास उत्तर देखें सही उत्तर: B) तत्पुरुष समास Explanation: पर + उपकार = पर के लिए उपकार. यहाँ 'के लिए' का लोप है. इसलिए तत्पुरुष. UPTET में समास से 2 प्रश्न पक्के. Q2. 'कामायनी' महाकाव्य के रचयिता कौन हैं? A) मैथिलीशरण गुप्त B) जयशंकर प्रसाद C) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' D) महादेवी वर्मा उत्तर देखें सही उत्तर: B) जयशंकर प्रसाद Trick: छायावाद के 4 स्तंभ: प्रसाद, पंत, निराला, महादेवी. कामायनी = प्रसाद, साकेत = गुप्त. Q3. 'जो पढ़ता है वही बढ़ता है' - वाक्य में कौन-सा सर्वनाम है...

शिक्षण संग्रह (Compendium) : शिक्षण संग्रह की अवधारणा एवं आवश्यकता - ( Concept and Need)

यह सर्वविदित है कि प्राथमिक विद्यालय के वातावरण का प्रभाव बच्चों (विद्यार्थियों) के सम्पूर्ण जीवन पर पड़ता है। प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षक/शिक्षिका अपने कार्य एवं आचरण के माध्यम से विद्यार्थियों में अनेक अच्छी आदतों जैसे- अनुशासित रहना, विद्यालय के नियमों का पालन करना, शिक्षकों का आदर-सम्मान करना, आपस में एक दूसरे का सहयोग करना आदि को सहज रूप में अंतरित द विकसित करते रहते हैं यही गुण कालांतर में बच्चों के व्यक्तित्व एवं सामाजिक जीवन में संस्कारों के रूप में परिलक्षित होते हैं।

बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में विद्यालय के शैक्षिक वातावरण की इस महत्त्वपूर्ण भूमिका के सन्दर्भ में अगर हम विचार करते हैं तो प्रमुख रूप से निम्नांकित अवयव उभर कर आते हैं विद्यालय भवन का अत्यंत आकर्षक और साफ सुथरा होना।

विद्यालय भवन की बाउण्ड्री वॉल का राष्ट्रीय प्रतीकों, रोचक खेलों, पशु-पक्षियों के रंगीन चित्रों से सुसज्जित होना।

विद्यालय भवन की दीवारों, खम्भों फर्श, बरामदों को महापुरुषों के चित्रों, आदर्श वाक्यों/सूक्तियों, वर्णमाला आदि से सुसज्जित होना।

कक्षा-कक्षों में समय सारिणी, शैक्षिक चार्ट्स मॉडल्स, लर्निंग आउटकम्स के चार्ट्स,रासायनिक सूत्र, गणित, विज्ञान के सूत्रों का भली प्रकार से प्रदर्शित होना।

 विद्यालय प्रांगण में पेड़-पौधे, वाटिका/ फुलवारी, सुसज्जित सक्रिय पुस्तकालय, खेल का मैदान/खेल सामग्री आदि का होना। प्रार्थना स्थल पर प्रतिदिन योग/व्यायाम/पी.टी./सामान्य ज्ञान/प्रेरक प्रसंगों जैसी गतिविधियों का होना।

. कक्षाओं में शिक्षकों द्वारा शिक्षण योजना के अनुसार पूरी लगन के साथ शिक्षण किया जाना।

कक्षाओं में बच्चों द्वारा सहज भाव से आनंदपूर्वक सीखने में संलग्न रहना। शिक्षकों द्वारा बच्चों के कार्यों का निरन्तर आकलन करते हुए सकारात्मक फीडबैक देना।

 कुल मिलाकर स्कूल का ऐसा वातावरण कि जिसमें विद्यार्थियों को न केवल शिक्षकों के द्वारा कल्कि कक्षाओं के तथा विद्यालय परिसर के परिवेश से भी सीखने को मिले।

वस्तुतः शिक्षण संग्रह (Compendium) से आशय एक पुस्तिका के रूप में ऐसी सूचनाओं का ग्रह है जो आकर्षक स्कूल परिसर, शिक्षण कौशलों, शिक्षण योजनाओं, लर्निग आउटकम्स, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं जैसे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारको से सम्बन्धित हैं तथा जिनका उपयोग शिक्षक दैनिक कक्षा शिक्षण के नियोजन एवं क्रियान्वयन कर सकते हैं।

आप शिक्षण संग्रह का उपयोग कैसे करेंगे ?

शिक्षण संग्रह का विकास शिक्षकों की आवश्यकताओं एवं उनके कार्य क्षेत्र में आने समस्याओं को दृष्टिगत रखकर किया गया है जिसमें प्रारम्भिक शिक्षा से संबंधित विविध सूचनाओं। उपयोगी जानकारियों का संकलन है।

 शिक्षा संग्रह (Compendium) का उपयोग निम्नवत तरीको करते हुए हम अपने कार्य को सरल-सुगम व रोचक बना सकेंगे।

शिक्षण संग्रह में उदाहरण स्वरूप दी गयी शिक्षण योजनाओं का उपयोग विषय आवश्यकतानुरूप कक्षा शिक्षण में करें।

संग्रह में शामिल भाषा, गणित, विज्ञान इत्यादि विषयों से संबंधित शैक्षिक क्रियाकलाप रो शैक्षिक खेल एवं गतिविधियाँ दी गयी है, जिनका कक्षा शिक्षण में उपयोग करके शिक्षण रोचक एवं प्रभावी बनाया जा सकेगा। संग्रह में कक्षावार,विषयवार, लर्निंग आउटकम्स और आकलन की विधियों का संदर्भ शि गया है जिससे इनपर सुगमतापूर्वक कार्य किया जा सकता है।

 विद्यालय भवन एवं परिवेश को आकर्षक व सीखने में सहायक के रूप में किस प्रकार उप किया जा सकता है, शिक्षण संग्रह से इसका संदर्भ लेकर आप अपने विद्यालय भवन ,परिवेश को आकर्षक तथा बच्चों को सीखने का साधन उपलब्ध करा सकते हैं।

 संग्रह में स्कूल में की जा रही प्रातःकालीन और सांध्यकालीन सभाओं एवं अनेक सह शै गतिविधियों एवं खेलकूद गतिविधियों का विवरण दिया गया है जिसके आधार पर इन स को रोचक व उपादेय बनाया जा सकेगा।

इस शिक्षण-संग्रह में अनेक शैक्षिक नवाचारों (Innovation) का उल्लेख किया गया है जि उपयोग आप कक्षा शिक्षण को प्रभावी बनाने तथा विद्यालय के भौतिक परिवेश को संस समृद्ध बनाने में कर सकते हैं।

शिक्षण संग्रह में प्रधानाध्यापकों के लिए विद्यालय नेतृत्व संबंधी जानकारियां दी गयी जिनका उपयोग कर प्रधानाध्यापक अपने विद्यालय विकास की योजना बनाकर अपने विद्यालयों में अपेक्षित शैक्षिक वातावरण का सृजन कर सकते हैं।

संग्रह में उत्तर प्रदेश में कार्यरत कुछ शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों के द्वारा सफलतापूर्वक किए जा रहे अनुकरणीय कार्यों की दी गई जिनको ध्यानपूर्वक हम अपने विद्यालय में गुणवत्तायुक्त शिक्षा एवं भौतिक संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित कर सकते हैं। 

शिक्षण संग्रह शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता विकास हेतु उपयोगी जानकारियों वेबसाइट, वेब लिंक, शैक्षिक साहित्य की हेल्पलाइन सम्पर्क सूत्र इत्यादि का विवरण दिया गया है जिनका सुगमता से उपयोग कर शिक्षक व्यावसायिक दक्षता का विकास कर सकेंगे।

 शिक्षण संग्रह में प्रभावी को अंग्रेजी वर्णमाला A से Z तक मार्गदर्शक सूत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसका उपयोग हम कक्षा शिक्षण में सफलतापूर्वक कर सकते हैं। भी यही चाहते कि सभी बच्चे सहज रूप से सीखें। 

उन्हें सीखने में आनन्द का अनुभव हो। पाठशाला में आकर्षक एवं संसाधन समृद्ध वातावरण हो जो बच्चों को सीखने और व्यक्तित्व निर्माण सहायक हो।

शिक्षकों के पास कक्षा शिक्षण सम्बन्धी ऐसी सभी एवं उपकरण उपलब्ध हो, जिनका उपयोग दैनिक शिक्षण कार्यों में कर सकें।

शिक्षक, बच्चों समुदाय के मध्य तालमेल हो। यह सब संभव हो, इसी दृष्टिकोण से आवश्यक हो।

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